Home
About Vinod Babbar
विषय (Topics)
_Social (सामाजिक मुद्दे )
_Politics (राजनीतिक मुद्दे)
_Justice (न्याय)
_Health (स्वास्थ्य)
_Foreign Policy (विदेश नीति)
_Indian Food (व्यंजन)
_Economy (अर्थव्यवस्था)
_Rashtra Kinkar (राष्ट्र किंकर)
_Literature (साहित्य)
_Education (शिक्षा)
_Spiritual (आध्यात्म)
Contact us (संपर्क)
20:01
Reviewed by
rashtra kinkar
on
20:01
Rating:
5
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)
Most Popular
वर्तमान में महाभारत की प्रासंगिकता Mahabharata and our time
महाभारत के विषय में कहा जाता है कि ‘जो यहाँ (महाभारत में) है वह आपको संसार में कहीं न कहीं अवश्य मिल जायेगा। और जो यहाँ नहीं है व...
क्या गजब का देश है Kya Gajab Ka Desh Hai-- Vinod Babbar
चारों तरह अव्यवस्था, राजनैतिक उठापटक, आरोप-प्रत्यारोपों के बीच प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान व्यक्ति द्वारा अजब मुहावरेदार भाषा का प्...
दिल्ली ने देखा दिनकर का तेज
ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में जब पशु-पक्षी भी सुरक्षित स्थानों में दुबक जाते हो तब राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की दो कालजयी कृतियों ‘...
भ्रष्टाचारः सवाल तो साधन शुद्धि का भी!
भ्रष्टाचारः सवाल तो साधन शुद्धि का भी! भ्रष्टाचार आजादी के बाद से लगातार आजाद होते-होते इतना शक्तिशाली बन चुका है कि कोई भी व्यक्ति ईमानदा...
भारत का स्कॉटलैण्ड है शिलांग Shillong- The Scotland Of India
शिलांग पीक पिछले दिनों पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजधानी शिलांग के साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने का निमंत्रण मिला। अनि...
भ्रष्टाचार, कार्टून और राजद्रोह Bhrastachar, Cartoon & Rajdroh Vinod Babbar
आज जब चहूं ओर भ्रष्टाचार का शोर है। राजनीति भ्रष्टाचार का पर्याय बनी दिखाई दे रही है ऐसे में युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने एक कार्...
धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्रथम बलिदानी थे गुरु तेगबहादुर
हमेशा की तरह इस बार भी साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था राष्ट्र किंकर द्वारा मकर-संक्रांति के अवसर पर आयोजित किया जाने वाला संस्कृति सम्मान...
आज अवशेष ही सही लेकिन कभी जाना जाता था रोम Vinod Babbar Rome
आज अवशेष ही सही लेकिन कभी जाना जाता था रोम रोम शब्द से परिचय बचपन से ही था क्योंकि इकबाल की पंक्तियों ें ‘यूनान, मिस्त्र, रोमां सब मिट गए...
क्या अब दिल्ली भी चलेगी देश के साथ? -- डा. विनोद बब्बर
दिल्ली एक बार फिर अपने भाग्य विधाताओं के द्वार पर पहुंच रही है। लोकतंत्र में मतदाता मोहर लगाने अथवा मशीन का बटन दबाने तक ही सही लेकिन नि...
पुण्य धरा भारत
उत्तरं यत् समुद्रस्य, हिमाद्रेश्चौव दक्षिणम्। वर्षं तद् भारतं नाम, भारती यत्र संतति।। अर्थात् हिन्द महासागर के उत्तर तथा हिमालय पर्वत के ...
Total Pageviews
Blog Archive
Blog Archive
April (2)
February (1)
January (1)
June (1)
May (5)
April (3)
March (5)
February (4)
January (5)
December (6)
November (2)
October (1)
July (2)
April (1)
March (2)
January (2)
December (1)
November (1)
October (3)
September (4)
August (5)
July (8)
June (2)
May (5)
April (5)
March (3)
February (7)
January (4)
December (8)
November (5)
October (6)
September (7)
August (10)
July (7)
June (3)
May (5)
April (5)
March (7)
February (6)
January (8)
December (8)
November (3)
October (3)
September (5)
August (9)
July (6)
June (5)
May (7)
April (5)
March (6)
February (5)
January (9)
December (5)
November (7)
October (7)
September (5)
August (1)
July (3)
June (5)
May (7)
April (5)
March (5)
February (6)
January (6)
December (8)
November (4)
October (6)
September (6)
August (6)
July (6)
June (4)
May (6)
April (3)
March (2)
February (4)
January (3)
December (4)
November (2)
October (4)
September (3)
August (7)
July (7)
June (4)
May (7)
April (3)
March (3)
February (3)
January (4)
December (7)
November (2)
September (3)
August (4)
July (3)
Followers
Vinod babbar. Powered by
Blogger
.