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भ्रष्टाचारः सवाल तो साधन शुद्धि का भी!
भ्रष्टाचारः सवाल तो साधन शुद्धि का भी! भ्रष्टाचार आजादी के बाद से लगातार आजाद होते-होते इतना शक्तिशाली बन चुका है कि कोई भी व्यक्ति ईमानदा...
दिल्ली ने देखा दिनकर का तेज
ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में जब पशु-पक्षी भी सुरक्षित स्थानों में दुबक जाते हो तब राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की दो कालजयी कृतियों ‘...
क्या गजब का देश है Kya Gajab Ka Desh Hai-- Vinod Babbar
चारों तरह अव्यवस्था, राजनैतिक उठापटक, आरोप-प्रत्यारोपों के बीच प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान व्यक्ति द्वारा अजब मुहावरेदार भाषा का प्...
धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्रथम बलिदानी थे गुरु तेगबहादुर
हमेशा की तरह इस बार भी साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था राष्ट्र किंकर द्वारा मकर-संक्रांति के अवसर पर आयोजित किया जाने वाला संस्कृति सम्मान...
साम्प्रदायिक बनाम धर्मान्तरण ----डा. विनोद बब्बर
इन दिनों कालाधन और भ्रष्टाचार के बाद धर्मान्तरण का बहुत शोर है। यदि ईमानदारी से विश्लेषण किया जाए तो यह तथ्य सामने आता है कि भ्रष्टाचार ...
वर्तमान में महाभारत की प्रासंगिकता Mahabharata and our time
महाभारत के विषय में कहा जाता है कि ‘जो यहाँ (महाभारत में) है वह आपको संसार में कहीं न कहीं अवश्य मिल जायेगा। और जो यहाँ नहीं है व...
छोटे व्यापारी की बर्बादी की तैयारी-----डा. विनोद बब्बर
पिछले दिनों स्कूल की जमीन पर बनी हमारे क्षेत्र की सब्जी मंडी को हटाने और बचाने पर जमकर राजनीति हुई। जाहिर है गरीब सब्जी विक्रेता अपनी र...
बढ़ती असहिष्णुता के दुष्परिणाम --- डा. विनोद बब्बर
दिल्ली जो कभी दिलवालो की नगरी कहलाती थी लेकिन बदलते दौर में दिल्ली की जनसंख्या बढ़ने के साथ ही उसका चरित्र भी बदला। सड़कों पर भीड़, जाम तो ...
महिला अस्मिता पर राजनीति का ग्रहण Nari asmita aur Rajniti
आश्चर्य होता है कि एक तरफ भारतीय संस्कृति में नारी को विशेष सम्मान प्राप्त है। हमारे जीवन के लिए सर्वाधिक उपयोगी धन की अधिष्ठाती देवी लक...
‘लगी है आग गंगा में, झेलम में, बताओं अब कहाँ जाके नहाया जाए!’
डा. विनोद बब्बर सत्ता के प्रति असहमति का स्वर कोई नई बात नहीं है। कभी सुप्रसिद्ध कवि धूमिल ने कहा था- वे सब के सब तिजोरियों के दुभाषि...
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