प्रेरणा-पर्व पर किशोर कृत ‘खरी-खरी’ प्रदर्शनी भी


भीलवाड़ा। विनायक विद्यापीठ, भुणास द्वारा हमेशा की तरह इस 25 दिसम्बर को भी प्रेरणा पर्व समारोह का आयोजन किया गया जिसमें  देश और राज्य के अनेक ख्यातिनाम साहित्यकारों और ज्ञान मनीषियों का समागम रहा। ज्ञातव्य हो विनायक विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को विनायक ज्ञान मनीषी महाराज शिवदान सिंह के जन्मदिन और अपने स्व. गुरुदेव भंवरलाल दुबे की स्मृति में प्रेरणा पर्व का आयोजन कर दो विभूतियों को सम्मानित करते हैं। इस बार  स्वामी ज्ञान अर्पितम् शिक्षक सम्मान कोटा विश्वविद्यालय  के कुलपति प्रो. परमेन्द्र दशोरा तथा 
विनायक प्रेरणा पुरुष सम्मान सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के प्रोफेसर और जाने-माने इतिहासकार प्रो. के एस गुप्ता को प्रदान किया गया। इस पुरस्कार में मेवाड़ी पाग, शाल तथा ग्यारह हजार की राशि, स्मृति चिन्ह भेंट किया जाता है।
डॉ गौरांगशरण देवाचार्य जी की अध्यक्षता  और श्री अशोक व्यास द्वारा संचालित इस समारोह में स्थानीय विधायक तथा राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक श्री कालू लाल गुर्जर , प्रशासनिक अधिकारी श्री मनोज शर्मा, राष्ट्र किंकर संपादक डॉ विनोद बब्बर के अतिरिक्त मेवाड़ क्षेत्र के अनेक शिक्षाविद् मनीषी, शिल्पी और संस्कृतिप्रेमी महानुभव मौजूद रहे। 
विनायक विद्यापीठ के अधिष्ठाता  डॉ देवेन्द्र कुमावत ने आगुन्तको का स्वागत करते हुए प्रेरणा- पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। विद्यापीठ परिसर में जाने माने कार्टूनिस्ट, साहित्यकार, रंगमंच कलाकार श्री किशोर श्रीवास्तव द्वारा पिछले 30 वर्षों से देशभर में प्रदर्शिज की जा रही सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करने वाले कार्टून प्रदर्शनी भी लगाई गई। समारोह में उपस्थित युवाओं ने इस प्रदर्शनी में बहुत रुचि लेते हुए उसके संदेश को अपने जीवन व्यवहार में लाने का संकल्प किया।
अपने उद्बोधन में जहां प्रो. परमेन्द्र दशोरा ने सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया वहीं प्रो. के एस गुप्ता ने मेवाड़ की गौरवशाली परम्परा का स्मरण करते हुए देशप्रेम और संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। विनोद बब्बर ने समकालीन बदलती परिस्थितियों में भी विनायक विद्यापीठ द्वारा छोटे शिल्पियों के सृजन और वैदिक पठन पठान की सराहना करते हुए भाषा और भारतीय मूल्यों को शिक्षा का अनिवार्य अंग बनाने की बात कहीं। अपने अध्यक्षीय उदबोधन में स्वामी गौरांग शरण देवाचार्य ने धर्म की अहमियत और जीवन में इनकी उपयोगिता नितांत आवश्यक है। बिना धर्म के जीवन का कोई मर्म नहीं, वर्तमान काल स्वर्णकाल में बदलता है तो राष्ट्रदशा पर गंभीर विचार और संवाद पर महागोष्टियाँ होनी चाहिए, ऐसा नैमिषारण्य वाला आश्रम है तो वो विनायक विद्यापीठ होगा।
इससे पूर्व कवि कैलाश मंडेला ने भृष्ट राजनीति और देश के हालात पर व्यंग्य बाण चलाये तो श्रीमनोज शर्मा ने जीवन की सरलता और तरलता पर दृष्टान्त सुनाये। किशोर श्रीवास्तव ने हास्य-व्यंग्य की अपनी रचनाओं से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस समारोह में एक ‘बहुत बड़े कवि’ द्वारा  महाराणा प्रताप को ‘साधारण राजा’ कहे जाने पर एक वक्ता ने दोनो शब्दों (महाराणा और साधारण राजा) को विरोधाभासी करार देते हुए कहा, ‘शायद सीमित भौगोलिक सीमाओं के चलते वह महाकवि ऐसी गलत बात कह गये लेकिन उन्हें यह ज्ञात नहीं होगा कि यूरोप के एक छोटे से देश आस्ट्रिया के विश्वविख्यात क्रिस्टल म्यूजियम में प्रवेश करते ही महाराणा के चेतक की विशाल प्रतिमा है। वियतनाम विश्व की महाशक्ति अमेरिका से बरसो जूझता रहा तो उसका श्रेय स्वयं उन्होंने महाराणा के प्राप्त प्रेरणा को दिया। मॉरीशस में भी महाराणा के नाम से संस्था है। महाराणा हमारी अस्मिता के प्रतीक है। सम्पूर्ण राष्ट्र में जो प्रतिष्ठा छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप और गुरु गोविन्द सिंह जी को प्राप्त है वह चक्रवर्ती सम्राटों को दुर्लभ है।’
इस अवसर पर दिल्ली से पधारे श्री अम्बरीश कुमार, खादरोच के स्वामी तोताराम, गुजरात के महंत सुनीलदास और श्री मन्नु भाई पटेल के अतिरिक्त बालवाटिका के संपादक श्री भैरूलाल गर्ग, डॉ के एस नाथावत, शिव लाल शर्मा, शंकर सिंह राणावत, अनिल बल्दवा, डॉ नरेंद्र शर्मा, सहित कई गणमान्य  विभूतियां उपस्थित थी।डॉ यश कुमावत, प्राचार्य श्री गोवर्धन लाल दाधीच और श्री राधेश्याम पारीक द्वारा आभार ज्ञापन के पश्चात  सभी अतिथियों ने परम्परागत व्यंजनों का आनंद लिया।  संपर्क-  09458514685, 09868211911
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1 comment

  1. वाह। शानदार रिपोर्ट।।

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